Friday, September 30, 2022
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सीरिया में तुर्की के हमले से गहराया मानवीय संकट, 70000 लोगों के विस्‍थापन के बाद बोले ट्रंप- हमारा फैसला सही

दमिश्‍क/वाशिंगटन : उत्‍तर-पूर्वी सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तुर्की की ओर से की गई सैन्‍य कार्रवाई की वजह से मानवीय संकट की स्थिति पैदा हो गई है। सीरिया में अमेरिकी समर्थक कुर्द बलों को निशाना बनाकर तुर्की की ओर से किए गए हवाई हमलों के बाद हजारों लोग पलायन को मजबूर हुए हैं। अंतरराष्‍ट्रीय जगत ने तुर्की की कार्रवाई की निंदा की है तो अमेरिका ने उत्‍तर पूर्वी सीरिया से अपने सैनिकों को अचानक ही वापस बुला लेने के फैसले को जायज ठहराया है, जिसे कुर्द बल अपने साथ विश्‍वासघात के तौर पर देख रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के अनुमान के मुताबिक, तुर्की की ओर से बुधवार को कुर्द ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों की वजह से लगभग 70,000 लोग विस्थपित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए तुर्की से अपनी ‘एकतरफा’ कार्रवाई रोकने के लिए कहा है। इस बीच अमेरिका ने उत्‍तर पूर्वी सीरिया से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले का बचाव किया है, जिसका ऐलान राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने रविवार को किया था। तब व्‍हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि तुर्की को सीरिया से लगी सीमा में ‘सीमित ऑपरेशन’ की अनुमति दी गई है, जिससे कुर्द बल अलग रहेंगे। हालांकि तुर्की ने जब हवाई हमले किए तो अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने जिस ‘सीमित ऑपरेशन’ की बात कही थी, उसका दायरा कहीं अधिक हो गया। बाद में सीरियाई सीमा की ओर से भी तुर्की के इलाके में मोर्टार दागे गए, जिससे बचने के लिए लोग इधर-उधर भागते नजर आए।

ट्रंप ने दी थी चेतावनी
अमेरिकी राष्‍ट्रपति से जब तुर्की के उनके द्वारा तय ‘सीमा’ से बाहर चले जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्‍होंने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया, बल्कि सिर्फ इतना कहा कि तुर्की को उनके रुख के बारे में मालूम है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनका इशारा संभवत: अपने उस बयान की ओर था, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि अगर तुर्की ने ‘सीमा’ पार की तो वह उसकी अर्थव्‍यवस्‍था को तबाह कर देंगे।

अमेरिका ने रविवार को किया था ऐलान

ट्रंप ने रविवार को जब अचानक ही उत्‍तर पूर्वी सीरिया से अमेरिकी सैनिकों को बुलाने का ऐलान किया था तो यह कई लोगों के लिए हैरान कर देने वाला था। यूरोपी देशों ने अमेरिका के इस फैसले से जहां सीरिया में रूस और ईरान का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई है, वहीं ट्रंप का यह फैसला अमेरिकी रक्षा कार्यालय पेंटागन के अधिकारियों की उस सोच के भी उलट रहा, इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ अभियान को जारी रखने के लिए उत्तर पूर्वी सीरिया में छोटी संख्या में ही सही अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति चाहते थे, जो यहां सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) के साथ मिलकर इस्लामिक स्टेट (IS) से लड़ रहे थे।
कुर्दों को आतंकी मानता है तुर्की
यहां उल्‍लेखनीय है कि एसडीएफ में कुर्द बलों का दबदबा है और यह कुर्दिश पीपुल्‍स प्रोटेक्‍शन यूनिट्स (YPG) की अगुवाई वाला सशस्‍त्र बल है, जिसे तुर्की आतंकी समूह मानता है। वह वाईपीजी को तुर्की में सक्रिय कुर्द विद्रोहियों के समूह का ही विस्तार मानता है और लंबे समय से इसकी वकालत करता था कि अमेरिका कुर्द बहुल वाले सशस्‍त्र बल एसडीएफ को सहयोग देना बंद करे। ऐसे में उत्‍तर पूर्वी सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का ट्रंप का यह ऐलान उसके लिए बड़ा मौका साबित हुआ।

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