Wednesday, February 8, 2023
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वूमेन इन लीडरशिपः एसजीआरआर यूनिवर्सिटी ने कुछ इस तरह मनाया महिला दिवस

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया। महिला दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को महिला अधिकारों की रक्षा और जागरूकता के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर मौजूद सभी वक्ताओं ने महिलाओं को सशक्त बनाने के बुनियादी सुझाव दिए।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने सभी को महिला दिवस पर शुभकामनाएं प्रेषित की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आत्मनिर्भर महिलाएं ही सशक्त समाज का निर्माण कर सकती हैं इसलिए महिलाओं को प्रत्येक स्तर पर आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार मिलना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यू.एस. रावत ने कहा कि महिलाएं समाज की विकास की धुरी हैं। इसलिए समाज में बराबरी जरूरी हैं। शिक्षा की इस दिशा में काफी अहम भूमिका हैं।

उन्होंने कहा कि श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय महिलाओं को हर स्तर पर समानता का अधिकार देने में विश्वास रखता है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय में प्रमुख पदों पर महिलाएं नियुक्त हैं तथा कुल स्टॉफ में लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। विश्वविद्यालय में नवीन शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत एमबीबीएस के विद्यार्थियों को गढ़वाली भाषा का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे उपचार के दौरान क्षेत्रीय लोगों की परेशानियों को उनकी भाषा में ही सही तरीके से समझें। मरीज और डॉक्टर के बीच उचित संवाद बन सके। डॉ. रावत ने कहा कि हमारा उद्देश्य विश्वविद्यालय को गढ़वाली भाषा के उत्कृष्टता के केन्द्र के रूप में स्थापित करना है।

इस मौके पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दीप्ति रावत भारद्वाज, उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन समिति ने कहा कि आज के समय में हमें लड़कियों के लिए निर्धारित कार्य अपने लड़कों को भी सिखाने पड़ेंगें तभी समतामूलक समाज की स्थापना हो सकेगी। एक ऐसे समाज में जहां महिलाएं सुरक्षित हों इसके लिए जेंडर संवेदनशीलता का पाठ पुरूषों को बचपन से ही सिखाना होगा। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं के खिलाफ जिस प्रकार के अपराध हो रहे हैं और समाज में जितनी भी कुरीतियां विद्यमान हैं इनको दूर करने की जिम्मेदारी पूरे समाज को लेनी होगी। साथ ही महिलाओं को हमें प्रारंभ से ही नेतृत्व के अवसर प्रदान करने होंगे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिता रावत, निदेशक यूसर्क ने कहा कि महिलाएं अपने आप में ही रोल मॉडल हैं। उत्तराखंड का जन्म ही मातृशक्ति के बलिदान और प्रयासों के कारण हुआ है। इसलिए हमें अपने अंदर आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा करनी होगी। हमें चुनौतियों को अवसर में बदलना होगा। उनका कहना था कि हमें महिलाओं की सफलता के पीछे छुपे संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की इस वर्ष की थीम ‘वीमेन इन लीडरशिप अचीविंग इन इक्वल फ्यूचर इन कोविड-19 वर्ल्ड‘ है। यह थीम कोरोना काल में और भी अधिक अहम और प्रांसगिक हो गई है।

इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दीपक साहनी ने कहा कि जागरूक महिलाएं ही एक संवेदनशील, बराबरी और न्यायसंगत समाज के निर्माण में सहयोगी हो सकती है। साथ ही हमें पुरूष और महिलाओं दोनों को प्रगति के समान अवसर देने होंगे।

कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे वयोवृद्ध गढ़वाली लेखक व कवि सुरेश ग्वाड़ी को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. मनीषा सिंह डॉ. मालविका कांडपाल, डॉ. सुनिता सिंह और डॉ. सुमन बिज द्वारा लिखित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा योगाभ्यास, कविता, महिला सशक्तिकरण की थीम पर नाटक तथा अन्य प्रस्तुतियां भी दी गई। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ. मालविका कांडपाल ने किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मानवाधिकार पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर की बात कही।

इस मौके पर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. मनोज गहलौत, परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय शर्मा, प्रो. रामालक्ष्मी, डॉ. पी.डी. जुआल, डॉ. कुमुद सकलानी, डॉ. अरूण कुमार, डॉ. कीर्तिमा उपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी, सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष के अलावा समस्त शिक्षक स्टॉफ और कर्मचारीगण मौजूद थे। कार्यक्रम में गणेश डबराल और रमेश ने तकनीकी सहयोग दिया।

लेखक व कवि सुरेश ग्वाड़ी सम्मानित

कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे वयोवृद्ध गढ़वाली लेखक व कवि सुरेश ग्वाड़ी को विश्वविद्यालय की ओर से शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें श्री दरबार साहिब की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम में उन्होंने अपनी स्वरचित कविताओं की प्रमुख पंक्तियों को सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि वे श्री दरबार साहिब के सभी गुरूओं पर पुस्तक लिख रहे हैं। श्री गुरू राम राय विश्वविद्यालय गढ़वाली भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जो कार्य कर रहा है वो अपने आप में सराहनीय है तथा पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होनें इस कार्य के लिए यथासंभव मार्गदर्शन और सहयोग देने की भी बात कही।

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