Home उत्तराखंड ईंट की जगह थर्माकोल से बनेगा भूकंपरोधी भवन

ईंट की जगह थर्माकोल से बनेगा भूकंपरोधी भवन

0

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के शोधार्थी व जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली की फैकल्टी द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि सीस्मिक जोन-पांच वाले क्षेत्र में ईंट की जगह थर्माकोल का इस्तेमाल कर बनाया गया चार मंजिला भवन भी अब भूकंप से सुरक्षित रह सकता है। सीस्मिक जोन पांच को भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक क्षेत्र माना जाता है और यहां आठ से नौ रिक्टर स्केल की तीव्रता वाले भूकंप आ सकते हैं। इस तकनीक से बनने वाला भवन भूकंपरोधी होने के साथ ही काफी कम समय में तैयार हो जाएगा।

ईंट की जगह थर्माकोल से बनाया जाने वाला भवन भूकंप के लिहाज से कितना सुरक्षित है, इसे लेकर आइआइटी रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग में वर्ष 2016 से शोध चल रहा था। यह शोध छात्र आदिल अहमद ने आइआइटी रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर योगेंद्र सिंह के निर्देशन में किया। शोधार्थी आदिल के अनुसार शोध में पाया गया कि यदि ईंट की जगह थर्माकोल का इस्तेमाल कर चार मंजिला तक भवन बनाया जाए तो उसे भूकंप के अधिक तीव्रता वाले झटकों से भी कोई नुकसान नहीं होगा।

शोधार्थी आदिल ने बताया कि भवन की नींव सामान्य भवन की तरह ही तैयार की जाती है। इसके बाद दीवार खड़ी करने के लिए तीन-तीन मिलीमीटर मोटी लोहे की दो जालियों के बीच 80 मिलीमीटर मोटे थर्माकोल को फिक्स किया जाता है। जालियों को लोहे के तारों से आपस में जोड़कर खड़ा किया जाता है फिर जालियों के बीच फिक्स किए गए थर्माकोल के दोनों ओर 35-35 मिलीमीटर कंक्रीट भरा जाता है। इस कंक्रीट को एयर कंप्रेशर से स्प्रे किया जाता है। कंक्रीट की पूरी तरह दीवार पर चिपकने के बाद इसे चिकना व समतल (स्मूथ) किया जाता है। इस दीवार की कुल मोटाई छह इंच होती है। दीवार पर किसी तरह के कालम नहीं होते। इसी तरह भवन की छत आदि का भी निर्माण होता है।

थर्माकोल से बने भवन की ये हैं विशेषताएं : 15 से 20 दिन में हो जाएगा तैयार,
50 से 60 फीसद कम होगा भवन का वजन, गर्मी में ठंडा और सर्दी में रहेगा गर्म,
भवन निर्माण सामग्री की होगी बचत, एसी का खर्चा होगा कम, अग्निरोधी होगा भवन।