Home उत्तराखंड राजनीतिः भाजपा सरकार की धड़कने बढ़ाते रहे हरक, अब हुआ निष्कासन

राजनीतिः भाजपा सरकार की धड़कने बढ़ाते रहे हरक, अब हुआ निष्कासन

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देहरादून। हरक सिंह रावत के भाजपा से निष्कासन के बाद उत्तराखण्ड में भाजपा-कांग्रेस में टिकट बंटवारे का गणित पूरा बदला नजर आने वाला है। हरक सिंह साल 2017 में भाजपा में 9 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हुए। उनके साथ आये कांग्रेस मूल के नेताओं को भाजपा में कैबिनेट में जगह दी। इससे कई भाजपाई उस दौरान ठगे रह गये।

भाजपाई कार्यकर्ता कांग्रेस मूल के इन नेताओं को कभी नहीं अपना पाये और समय-समय पर कार्यकर्ता इनकी खिलाफत करते भी नजर आये लेकिन हाईकमान के आगे सभी मौन रहे।

हमेशा की तरह हरक सिंह रावत इस बार भी अपने मत्री के तौर पर पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये। भाजपा ने उन्हें पार्टी से भी निष्कासित कर दिया। वे तकरीबन पांच साल भाजपा में रहे लेकिन सरकार और हाईकमान की धड़कने बढ़ाते रहे है। पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र रावत से उनकी अदावत बनी रही।

लेकिन पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र के पद से इस्तीफे के बाद मानो उनकी मुराद पूरी हुई। उसके बाद वे अपनी शर्तों को मनाने के लिए समय-समय पर खेल रचते रहे। कैबिनेट मीटिंग में अपने इस्तीफे का भी ऐलान कर आये। सरकार ने उन्हें मनाने के लिए कोटद्वार मेडिकल कालेज के लिए 5 करोड़ की बजाय 25 करोड़ की धनराशि का भी ऐलान किया। इसके बाद भी हरक नाराज ही दिखाई दिये।

प्रदेश में टिकटों के बंटवारे के लिए हुई कोर कमेटी की मीटिंग में वे दिखाई नहीं दिये। जानकार बताते है कि हरक सिंह रावत अपने और अपनों के मनमाफिक सीट चाहते हैं, लेकिन भाजपा हाईकमान से उनकी बात नहीं बन पाई। जिसके बाद भाजपा ने आखिरकार उनके पार्टी से निष्कासित करने का फैसला लिया।
जानकार बताते हैं कि दिग्गज नेता हरक सिंह के निष्कासन के बाद अब इसका बड़ा असर भाजपा और कांग्रेस के टिकट बंटवारे पर पड़ेगा। हरक सिंह रावत भाजपा हाईकमान से लगातार अपनी बहू अनुकृति समेत अपने समर्थक विधायकों की टिकट की पैरवी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने प्रेशर पॉलिटिक्स का पूरा सहारा लिया। लेकिन उनकी बात नहीं बन पाई। अब उनकी कांग्रेस की घर वापिसी की अटकलें है।

जाहिर तौर पर संभावना है कि टिकटों की शर्त पर ही कांग्रेस में घर वापिसी करेंगे। यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस में इसका बड़ा असर पड़ेगा। कांग्रेस में भी टिकटों के बंटवारे के बाद बड़े घमासान का अंदेशा है। कांग्रेस के नेता भी पिछले पांच साल से लगातार अपने चुनावी क्षेत्र में बने हुए यदि कांग्रेस हरक की शर्ते मानती है तो उन क्षेत्रों में बगावत के पूरे आसार हैं जहां से हरक समर्थकों को टिकट दिया जाएगा।