Wednesday, February 8, 2023
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मिशन 2022ः धनौल्टी की जनता ने पुराने चेहरों को कहा ना, हर बार नया चेहरा भेजा विधानसभा

देहरादून। उत्तराखण्ड की राजनीति में सत्ता परिवर्तन को लेकर कई मिथक हैं। प्रदेश के 22 सालों के राजनीतिक इतिहास में ये मिथक कभी नहीं टूटे। राजनीतिक दलों ने इन मिथकों को तोड़ने की पुरजोर कोशिश की लेकिन ये मिथक नहीं टूटते। ऐसा एक मिथक धनौल्टी विधानसभा से भी जुड़ा है। यहां की जनता ने हर बार नये चेहरे को विधानसभा भेजती है।

राजनीति से जुड़े मिथक

एक मिथक सीएम आवास को लेकर भी है। जो भी सीएम वहां रहा वो अपना कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर पाया। त्रिवेन्द्र के इस्तीफ के बाद इस मिथक पर और विश्वास हो गया है। इसके अलावा गंगोत्री और रानीखेत विधान सभा से भी मिथक जुड़े हैं तो प्रदेश के शिक्षा मंत्री से भी मिथक जुडा हुआ है। जो मिथक कभी भी नहीं टूटे।

धनौल्टी विस से जुड़ा मिथक

कहा जाता है कि धनौल्टी विधानसभा की जनता हर बार नये चेहरे पर अपना भरोसा दिखाती है। साल 2002 से धनौल्टी विधानसभा के इतिहास पर नजर डाले तो यहां 2002 के विधानसभा चुनाव में इस सीट कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार कौल दास विधायक चुने गए थे। 2007 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार खजान दास विधायक चुने गए। 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महावीर सिंह विधायक चुने गए थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार प्रीतम सिंह पंवार विधायक चुने गए। एक बार फिर प्रीतम सिंह पंवार भाजपा की तरफ से यहां चुनावी मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से अभी कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा गया है। और आम आदमी की तरफ से युवा नेता अमेन्द्र बिष्ट चुनावी मैदान में है। यदि इन मिथकों पर भरोसा किया जाय तो इस बार आप आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमेन्द्र बिष्ट का विधान सभा पहुंचना निश्चित है।

अमेन्द्र का राजनीतिक करियर

अमेन्द्र बिष्ट बिष्टौसी वार्ड से लगातार दो बार के जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सका है कि वे इस बार निर्विरोध जिला पंचायत सदस्य चुने गये। वे छात्र राजनीति के दमदार चेहरा रहे जो पत्रकारिता से होते हुए अब क्षेत्रीय राजनीति का बड़ा चेहरा बन गए हैं।

राजनीति में चाहते है बदलाव

अमेन्द्र बिष्ट अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी के धनौल्टी से उम्मीदवार हैं। अमेन्द्र बताते हैं कि वे ‘आप’ में राजनीति करने नहीं आये बल्कि राजनीति बदलने आये हैं। वे कहते हैं कि उत्तराखण्ड में बारी-बारी से भाजपा और कांग्रेस ने राज किया। लेकिन आज भी उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य के हालात बदले नहीं हैं।

अमेन्द्र बेहतर समझ-बूझ व जनसम्पर्क में निपुण टिहरी के सबसे सक्रिय जिला पंचायत सदस्यों में से है, राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अमेन्द्र उत्तराखंड की राजनीति के नए सितारे हैं उम्मीद कर सकते है कि वो जनप्रतिनिधित्व के क्षेत्र में बेहतर नजीर प्रस्तुत करेगें।

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